हम बन के राख बिखर जायेंगे ।।
मिट्टी का जिस्म मिले मिट्टी में ।
ले कर क़्या साथ बशर जायेंगे ।।
आईनों से मत सच को पूछो ।
सुन के सच, आप मुकर जायेंगे ।।
यादों के रंगबिरंगे धागे ।
हम ग़ज़लों में बुनकर जायेंगे ।।
पेचीदा रूह बड़ी ये दुनिया।
समझे तो आप सँवर जायेंगे ।।
वाह्ह लाज़वाब गज़ल सर।
ReplyDeleteसादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १० फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
आईनों से मत सच को पूछो
ReplyDeleteअब आईने भी सच नहीं बताते हैँ
सुन्दर
वाह !
ReplyDeleteयादों के रंगबिरंगे धागे ।
हम ग़ज़लों में बुनकर जायेंगे ।।
बहुत खूब !