महानगर का काव्य

ऋषिकेश खोङके "रुह"

Thursday, August 13, 2026

कोड माझा मनाचे

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कोड माझा मनाचे गुपित राहिले। आत काहीतरी बस जळित राहिले।। बोललो मी न काही तुला शेवटी। शब्द ओठांत माझे खचित राहिले।। दूर गेली तरी साथ सुटले कु...
Saturday, August 1, 2026

धीमी आँच

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धीमी आँच पे रिश्तों को पकने दो, सुख-दुख के मसाले सारे घुलने दो। नेह की हाँडी जब महक उठे, वक़्त की कलछी धीरे चलने दो। मिट्टी के चूल्हे-सी सुल...
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Thursday, July 30, 2026

अश्क अपने (ग़ज़ल)

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अश्क अपने पिया कर। ग़म नशा है, किया कर।। रात-दिन दौड़ता है। मन कभी तो रुका कर।। इक तमाशा है दुनिया। बैठ के बस तका कर।। साँस का क्या भरोसा। ज़...
Wednesday, July 29, 2026

असर में रहा (ग़ज़ल)

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किसी ना किसी के असर में रहा। किनारे बंधा, पर लहर में रहा।। न दरबार मेरा, न कोई महल। जहां भी रहा अपने घर में रहा।। झुकाना ज़माने ने चाहा मुझ...
Friday, July 3, 2026

मेघा आये रे

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घुँघरू बाँध मेघा आये रे , छनन छनन गरजाए रे , वीना के सुर बोले बीजूरीया , पखवाज बदर सुनाए रे। घुँघरू बाँध मेघा आये रे। दादुर पोखर शोर मचाये ,...
Thursday, July 2, 2026

नेता हूँ मैं

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बिन पेंदी का लोटा हूँ मैं,  सही पहचाने, नेता हूँ मैं। चरैवेति मंत्र मानता हूँ,  स्व लाभ पहचानता हूँ, गधा कितना भी हो गधा, वक़्त पडे, बाप मान...
Thursday, April 9, 2026

सांवरिया

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ऐसो कैसो रे तू सांवरिया, खुद आवे ना भैजे पतिया।। घर छोड़े पिया, बीते बरसों, भूल गये देस, भूले हमको, ड्योढी घर की, तोहे पुकारे,  धूल लथपथ, सा...
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