महानगर का काव्य

ऋषिकेश खोङके "रुह"

Tuesday, September 15, 2026

सफ़रनामा

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कभी सफ़र पर निकलना, कभी किसी बियाबान में रास्ता ढूँढ़ते-ढूँढ़ते खुद को खो देना। कभी रोज़गार की तलाश में चप्पलों के तलवे घिसना, कभी किसी की न...
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Thursday, August 13, 2026

कोड माझा मनाचे

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कोड माझा मनाचे गुपित राहिले। आत काहीतरी बस जळित राहिले।। बोललो मी न काही तुला शेवटी। शब्द ओठांत माझे खचित राहिले।। दूर गेली तरी साथ सुटले कु...
Saturday, August 1, 2026

धीमी आँच

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धीमी आँच पे रिश्तों को पकने दो, सुख-दुख के मसाले सारे घुलने दो। नेह की हाँडी जब महक उठे, वक़्त की कलछी धीरे चलने दो। मिट्टी के चूल्हे-सी सुल...
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Thursday, July 30, 2026

अश्क अपने (ग़ज़ल)

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अश्क अपने पिया कर। ग़म नशा है, किया कर।। रात-दिन दौड़ता है। मन कभी तो रुका कर।। इक तमाशा है दुनिया। बैठ के बस तका कर।। साँस का क्या भरोसा। ज़...
Wednesday, July 29, 2026

असर में रहा (ग़ज़ल)

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किसी ना किसी के असर में रहा। किनारे बंधा, पर लहर में रहा।। न दरबार मेरा, न कोई महल। जहां भी रहा अपने घर में रहा।। झुकाना ज़माने ने चाहा मुझ...
Friday, July 3, 2026

मेघा आये रे

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घुँघरू बाँध मेघा आये रे , छनन छनन गरजाए रे , वीना के सुर बोले बीजूरीया , पखवाज बदर सुनाए रे। घुँघरू बाँध मेघा आये रे। दादुर पोखर शोर मचाये ,...
Thursday, July 2, 2026

नेता हूँ मैं

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बिन पेंदी का लोटा हूँ मैं,  सही पहचाने, नेता हूँ मैं। चरैवेति मंत्र मानता हूँ,  स्व लाभ पहचानता हूँ, गधा कितना भी हो गधा, वक़्त पडे, बाप मान...
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