Thursday, July 30, 2026

अश्क अपने (ग़ज़ल)

अश्क अपने पिया कर।
ग़म नशा है, किया कर।।

रात-दिन दौड़ता है।
मन कभी तो रुका कर।।

इक तमाशा है दुनिया।
बैठ के बस तका कर।।

साँस का क्या भरोसा।
ज़िंदगानी जिया कर।।

ख़्वाब रख आँख में तू।
ख़्वाब से मत डरा कर।।

मौन भी बोलता है।
उससे बातें किया कर।।

दर्द जब हद से गुज़रे।
गीत कोई लिखा कर।।

रात चुपचाप रोना।
दिन में हँसते रहा कर।।

"रूह" पत्थर मिलेंगे।
आईना मत हुआ कर।।

Wednesday, July 29, 2026

असर में रहा (ग़ज़ल)

किसी ना किसी के असर में रहा।
किनारे बंधा, पर लहर में रहा।।

न दरबार मेरा, न कोई महल।
जहां भी रहा अपने घर में रहा।।

झुकाना ज़माने ने चाहा मुझे।
लड़ा उम्र सारी, समर में रहा।।

मुझे हार ने भी सँवारा बहुत।
गिरा भी, उठा भी, सफ़र में रहा।।

बिके लोग महफ़िल में औक़ात पर।
वहाँ "रूह" असली ख़बर में रहा।।

Friday, July 3, 2026

मेघा आये रे

घुँघरू बाँध मेघा आये रे ,
छनन छनन गरजाए रे ,
वीना के सुर बोले बीजूरीया ,
पखवाज बदर सुनाए रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे।

दादुर पोखर शोर मचाये ,
टर्र-टर्र टर्र आलाप लगाए ,
टपटपटप बूंदन की अब तो ,
जियरा मोरा हुलसाए रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे।

झिमिर-झिमिर ये मंद फुहारें ,
मल्हार गावे सब नगरी द्वारे ,
जलतरंग सुन बरखा की ये ,
अकुलाये मोरी अटरिया रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे ।

पवन चले मगन, मतवारा,
भीगे पपीहा, वन भी सारा ,
तरकश से तीर इंद्र निकाले,
सप्त रंग जगत दिखलाये रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे ।

Thursday, July 2, 2026

नेता हूँ मैं

बिन पेंदी का लोटा हूँ मैं, 
सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

चरैवेति मंत्र मानता हूँ, 
स्व लाभ पहचानता हूँ,
गधा कितना भी हो गधा,
वक़्त पडे, बाप मानता हूँ।
मक्कारी भरी है खून में, 
सच्चा कलयुगी बेटा हूं मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

वादों की खेती करता हूँ,
सपने आँखों में भरता हूँ,
कुर्सी देख मैं गिरगिट सा,
अपना रंग बदलता हूँ।
सिद्धांत बेच के मंडी में,
नोट करारे लेता हूँ मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

जनता का तबतक मान है,
जब तक देश में मतदान है,
जीत गये तो पाँच बरस तक,
अपुनच साला भगवान है।
फिर बिसात क्या जनता की है,
मंदिर को भी ठग लेता हूं मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

दल बदलने को नीति कहूँ,
टिक जाने को प्रीति कहूँ,
सत्ता जिस करवट बैठी हो,
उस करवट की रीति कहूँ।
आराधक हूँ, अवसर का,
पलटी खाने को बैठा हूँ मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं

कुर्सी ही मेरा धर्म ग्रंथ है, 
कुर्सी ही मेरा जाती पंथ है, 
कुर्सी मेरी पूजा-अर्चना,
कुर्सी ही मेरा आदि अंत है।
कुर्सी हो तो, हूं मैं कलियुग,
अन्यथा फिर त्रेता हूं मैं ।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।