महानगर का काव्य

ऋषिकेश खोङके "रुह"

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Thursday, October 3, 2024

देवी ब्रह्मचारिणी

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1.  स्वर्ण हिमालय की कुमारी, पार्वती सरस रूप धारी, तप की धारा-सी निर्मल, शांत, मनोहर, कोमल। 2.  अंजुलि में माला झलके, कमंडल संग कर मधुरिम, श...
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