महानगर का काव्य

ऋषिकेश खोङके "रुह"

Monday, February 27, 2023

तेरी यादों का स्वेटर

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 आज फिर, दिल की अटैची से, नसाफत से तह किया हुआ, तेरी यादों का स्वेटर निकाला है । अब भी तेरी खुशबू इसमें महकती है । मुझे उम्मीद है, ऐसा एक स्...

जहन से तेरी तस्वीर हटाऊं कैसे

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 जहन से तेरी तस्वीर हटाऊं कैसे | सांस है तू, फिर लेना भूल जाऊं कैसे || मिनट में सौ बार धड़कता है लैकिन | दिल की धड़कन तुम्हे सुनाऊं कैसे || ...
Monday, January 16, 2023

अमृत

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 तेरी यादों से महकने को अनंतकाल तक, सोचता हूं, चांद की रोशनी में भीगा हुवा, एक कटोरी दूध, शरद पुनम की रात पी लूं, सुना है उस दिन , चांद की र...
Saturday, September 19, 2020

इक मर्ज ने सब बिगाड़ दिया।

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 इक मर्ज ने सब बिगाड़ दिया। आसरा कितनो का उजाड़ दिया ।। भूख से बिलबिलाता था वो बच्चा। तो खाना कचरे से जुगाड दिया।। ज़िन्दगी की खातिर मिलों च...
Friday, September 11, 2020

पीढ़ा की आंच को ज़लने दो

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अति पीढ़ा में  दीर्घ काल तक बने रहना, पीढ़ा को भुला देता है। देखता हूं हम सब भी, भूल चले हैं, की किस अति भयावह संकट से,  हम झुझ रहे हैं । भू...
Tuesday, July 30, 2019

बस तेरे नाम

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बस तेरे नाम कर दी मैंने | ज़िन्दगी तमाम कर दी मैंने || एक लत तेरी छूटती ही नहीं | बाकी तो हराम कर दी मैंने || इंतिहा इंतिजार की ना पुछ...
Sunday, March 17, 2019

अहसास

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मन की , फटी जेब से, अभी-अभी गीरा और टुट गया, एक अहसास , की तुम मिलोगे कभी ! देखें थे आँखों ने जो शबनमी, टूट गए हैं वो ख्वाब, की तु...
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