महानगर का काव्य
ऋषिकेश खोङके "रुह"
Monday, August 28, 2023
लाख कह दो तुम की ख़राब
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लाख कह दो तुम की ख़राब है। मुझे सुकूं देने वाली शराब है ।। मसला जो उसने ,दिल था मेरा। शायद सोचा महज़ गुलाब है ।। क्यूं भटकता है दिले- आवारा।।...
Wednesday, August 23, 2023
चांद पाने की ख़्वाहिश कर के देखो।
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चांद पाने की ख़्वाहिश कर के देखो। हौसले की आज़माइश कर के देखो।। क्या पता दिल तुमको दे ही बैठे। एक बार फ़रमाइश कर के देखो।। कोई कीमत नही है ज...
ज़िंदगी अपनी ख़ाक करते रहे।
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ज़िंदगी अपनी ख़ाक करते रहे। तजुर्बात हम लाख करते रहे।। आगे बढ़ने की चाहत थी उनको किस किस को वो बाप करते रहे। अब बैठे हैं आपके सामने तो आप के...
मुझमें कुछ तेरे जैसा रहता है।
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मुझमें कुछ तेरे जैसा रहता है। मैं तेरी धड़कन हूं ये कहता है।। अश्क नही है ये तो बस पानी है। एक समंदर आंखों से बहता है।। मुझ से मत पूछिए हिज्...
फासिला दरमियान इतना तो न था
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फासिला दरमियान इतना तो न था। सोचा था तूने जितना उतना तो न था ।। जानते हो नज़र उठेगी तो ज़रूर। फिर मेरे ही सामने रुकना तो न था।। नशा हुस्न का...
Friday, July 14, 2023
हमारी नदियां मर रहीं हैं।
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हमारी नदियां मर रहीं हैं। देखता हूं की पानी की जगह, हमारे ही मल मूत्र से भर रहीं है। दो पीढ़ी पुराने जो बचे हैं लोग, कहते हैं कि, हम कभी नहा...
Friday, July 7, 2023
ग़ज़ल
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बातों में तेरी जायका हरबार अलग है। कुछ तो बात है तुझमें जो यार अलग है।। जख्म नही होता लेकिन दिल में चुभते हैं। ज़ालिम ये तेरी आंखों के औजार ...
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