महानगर का काव्य
ऋषिकेश खोङके "रुह"
Wednesday, June 12, 2024
सौदाई को माने रखते हैं (ग़ज़ल/
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सौदाई को माने रखते हैं। तेरे खत सिरहाने रखते हैं।। तुम कब आते हो कब जाते हो । सारा इल्म दिवाने रखते है।। कीमत फूल की बढ़ जाए है जब । जुल्फो...
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Thursday, May 30, 2024
वो गांव छोड़ नगर आया है (ग़ज़ल)
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वो गांव छोड़ नगर आया हैं । क्या सोच कर इधर आया है ।। नकली फूल हवा पत्ते सब । क्या लेने वो नगर आया है ।। जल्दी रात में सोने वाला । पब से ...
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Sunday, May 26, 2024
भक्त सभी आगे पीछे हैं (ग़ज़ल)
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भक्त सभी आगे पीछे है। कीड़े मकोड़े बस नीचे है।। फूल रही है नफरत काफ़ी। जाने कौन इसको सींचे है।। बढ़ जाए जो ख़ुद से आगे। सब नीचे उसको खींचे ह...
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Monday, May 20, 2024
हाकिम से बदजुबानी करते हैं
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हाकिम से बदजुबानी करते हैं । चलो हम कुछ तुफानी करते हैं ।। ख़ूब घूमे हैं जो कर के सीना चौड़ा। आज उनको पानी पानी करते हैं ।। भूखे रोज़ सो जात...
काहे लड़ी मैं
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** कलहांतरिता **: नाट्यशास्त्र के अनुसार जो नायिका पहले प्रिय से झगड़ा करती है और उसके चले जाने के बाद पछताती है काहे लड़ी मैं सखी पिया से।...
Sunday, May 19, 2024
रास पूर्णिमा
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**शुक्लाभिसारिका** जो नायिका चांदनी रात में श्वेत वस्त्र धारण कर नायक अभिसार को जाती है शुभ्र वस्त्र देह धारण, केश काले कर संभारण। नखशिख अं...
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Saturday, May 18, 2024
सारी मय उतर गई (ग़ज़ल)
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सारी मय उतर गई । जब उन पर नज़र गई ।। हैरां चांद सोचकर । वो कितना निखर गई ।। आशिक इश्क़ में जले । क्या उनको ख़बर गई ।। रुप उसका तिलिस्म है ।...
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