महानगर का काव्य
ऋषिकेश खोङके "रुह"
Wednesday, April 30, 2025
दिल लगाने का (ग़ज़ल)
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दिल लगाने का इनआम देना पड़ा। अपने अहसास को नाम देना पड़ा।। थरथराई ज़बां, लड़खड़ा भी गई । आँख को होंठ का काम देना पड़ा ।। हसरतों की तपिश में ...
Friday, April 4, 2025
जइयो नाहीं ओ घनश्याम रे (गीत)
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जइयो नाहीं ओ घनश्याम रे, जइयो नाहीं मोरे नैना तोका निहारते, जइयो नाहीं।। हम घूँघट उठावें के मुख तोरा प्रान भयो, प्रीत लागी ऐसी, हियरा भी जान...
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Thursday, March 27, 2025
बस जिक्र तिरा
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बस जिक्र तिरा ही रूहानी है ।। बाकी दुनिया में सब फ़ानी हैं ।। जादू तेरी आँखों का तौबा । भूला की पलकें झपकानी है ।। तेरी यादें हैं गोया जुगन...
Tuesday, March 18, 2025
**हाइकु** को **पहेलियों** के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास
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बचपन में अमीर खुसरो की पहेलियां पढ़ीं थी, अभी ख्याल आया तो सोचा क्यों न हाइकु के साथ प्रयोग कर के देखा जाए। तो प्रयोग करने का प्रयास किया है...
Monday, March 17, 2025
**उलटबांसी हाइकु**
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पत्तों बिना ही दरख़्त ने दी छाया धूप हंसी खूब। घर था खाली, बोल उठीं दीवारें, चीखा सन्नाटा। शून्य भीतर, अनहद का नाद, कौन सुनेगा? प्यासी मछली...
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Wednesday, March 12, 2025
होरी
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होरी में छलिया छल कर गयो, गुलाल अबीर हमे रंग कर गयो... हम तो भिगोने की सोचत रहे, हमको ही कान्हा तर कर गयो... होरी में छलिया छल कर गयो.... प...
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Friday, January 24, 2025
उम्मीदों का बोझ (ग़ज़ल)
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उम्मीदों का बोझ उठा कर खड़े रहे। कंधों को ता-'उम्र झुका कर खड़े रहे।। खुश रहने का फ़न मालूम नहीं उनको मुखड़ा जो बेकार फुला कर खड़े रहे।।...
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