हम बन के राख बिखर जायेंगे ।।
मिट्टी का जिस्म मिले मिट्टी में ।
ले कर क़्या साथ बशर जायेंगे ।।
आईनों से मत सच को पूछो ।
सुन के सच, आप मुकर जायेंगे ।।
यादों के रंगबिरंगे धागे ।
हम ग़ज़लों में बुनकर जायेंगे ।।
पेचीदा रूह बड़ी ये दुनिया।
समझे तो आप सँवर जायेंगे ।।
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