महानगर का काव्य
ऋषिकेश खोङके "रुह"
Thursday, April 9, 2026
सांवरिया
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ऐसो कैसो रे तू सांवरिया, खुद आवे ना भैजे पतिया।। घर छोड़े पिया, बीते बरसों, भूल गये देस, भूले हमको, ड्योढी घर की, तोहे पुकारे, धूल लथपथ, सा...
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Saturday, March 28, 2026
कठौती में गंगा
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मन चंगा तो कठौती में गंगा, साधो ये बात हुई पुरानी। मन तो प्रदुषित पहले ही थे, अब प्रदुषित गंगा का पानी।। आचमन अब कहाँ सम्भव है, इस गंगा, ज...
Friday, March 13, 2026
प्रेम की भाषा
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प्रेम की भाषा का कोई व्याकरण नहीं होता । मनोभाव को शब्दों का छद्मावरण नहीं होता ।। सागर से भी अथाह, हृदय की अनुभूति है, अंतस में आकाश से अव...
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Tuesday, March 10, 2026
साजन तुम नहीं आए
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द्वार खड़ी मैं, जुग बीते, साजन तुम नहीं आए। भोर भई फिर साँझ ढली, फूल बनी, कुम्हलाई कली, चैत्र चला, फागुन भी बीता, अखियन सूखी जाए। साजन तुम न...
Friday, March 6, 2026
चाह है इश्क़
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चाह है इश्क़, आह भी है। ज़िंदगानी तबाह भी है।। दास्ताँ सब नही सुनहरी। बारहा ये सियाह भी है।। ज़ीस्त के पाँव जल रहे हैं। धूप इसकी गवाह भी है।...
Tuesday, February 24, 2026
दुनिया री
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दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे, इसारों पे नाहक, हाकन लागे मोहे । क्या पहनू और कैसा दिखूँ मैं, कब किसको क्या कैसे कहूँ मैं, नेरेटिव भईया फि...
Thursday, February 5, 2026
आएगा वक़्त गुज़र जायेंगे
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आएगा वक़्त गुज़र जायेंगे । हम बन के राख बिखर जायेंगे ।। मिट्टी का जिस्म मिले मिट्टी में । ले कर क़्या साथ बशर जायेंगे ।। आईनों से मत सच को पूछ...
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