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Tuesday, March 18, 2025

**हाइकु** को **पहेलियों** के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास

बचपन में अमीर खुसरो की पहेलियां पढ़ीं थी, अभी ख्याल आया तो सोचा क्यों न हाइकु के साथ प्रयोग कर के देखा जाए।
तो प्रयोग करने का प्रयास किया है **हाइकु** को **पहेलियों** के रूप में प्रस्तुत करने का। 
पसंद आए तो बताएं 🙏🙏😊

**1. पहेली**
पाँव नहीं हैं,
थके ना वो फिर भी,
रोको तो भागे!

**उत्तर:**
पानी

**2. पहेली**
बड़ा ही हल्का,
सांस भर सीने में,
उड़ता फिरे!

**उत्तर:**
गुब्बारा

**3. पहेली**
 बाँटो जितना,
बढ़ता है उतना,
बड़ा अजीब!

**उत्तर:**
ज्ञान

**4. पहेली**
चपटा सिर,
मुंह है नुकीला,
नहीं है पेट।

**उत्तर:**
कील

**5. पहेली**
सफेद दाढ़ी,
हवा में वो उड़ता,
गिरे न नीचे।

**उत्तर:**
बादल 

**6. पहेली**
दो दांत वाला,
कट कट करता
काटता फिरे!

**उत्तर:**
कैंची

**ऋषिकेश खोडके "रूह"**

Monday, March 17, 2025

**उलटबांसी हाइकु**

पत्तों बिना ही 
दरख़्त ने दी छाया
धूप हंसी खूब।

घर था खाली,
बोल उठीं दीवारें,
चीखा सन्नाटा।

शून्य भीतर,
अनहद का नाद,
कौन सुनेगा?

प्यासी मछली,
जग वैतरणी में,
प्यास न बुझी ।

तन का बीज,
मन के तल पर,
खेत हैं मौन।

शब्द बहते 
गंगोत्री है मौन की,
सुनेगा कोई?

तेज धूप में,
देखो पकती छांव ,
कौन खायेगा?

अज्ञान तम,
ज्ञान दीपक तले,
सत दिखेगा?

वो अकिंचन
समाहित सबमें,
अंतस यात्रा।

Monday, February 23, 2009

स्वप्न पिया के -हाइकु

ब्रम्ह मुहुर्त
एक सपना देखा
पिया मिलेंगे |

सच होंगे क्या
देखें हैं जो सपने
मैंने तुम्हारे |

तुम्हारा साथ
सपना है शायद
ये तुम्ही तो हो ?

नयन मेरे
रात्री के अभिलाषी
स्वप्न तुम्हारे |

Sunday, September 30, 2007

मन के हाइकु


सोचा बहूत ,
निर्विचार ही रहा
उदास मन |

हवा से तेज,
दौडा मन पखेरु,
स्थिर ही रहा |

अक्षर झरे,
विलोपे रूप सारे,
रहा तो मन |

रुके ना मन ,
जल थल आकाश,
सहसा चले |

सहस्त्रधार,
काया एक अनेक,
एक ही मन |

Tuesday, April 17, 2007

बचपन के हाइकु

भूलें तो कैसे

बचपन के दिन

गुड्डे गुडिया


मिट्टि के घर

वो रेत के घरोंदे

बच्चो के खेल


सोते समय

दादी की कहनियां

राजा रानी की


जिद करना

रोकर मना लेना

जो चाहो पाना

होली के हाईकु

टेसु के रंग

फागुन की बयार

होली की धुम



रंगो का खेल

गालों पे गुलाल

हाथ अबीर



बच्चो का शोर

रंग भरी पिचकारी

लो भर मारी



घोटि ठंडाई

देखो झुमे कन्हाई

हुवे मलंग



जली होलिका

विनाशी बुराई भी

बचा पूण्य क्या ?