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Tuesday, February 24, 2026

दुनिया री

दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे,
इसारों पे नाहक, हाकन लागे मोहे ।

क्या पहनू और कैसा दिखूँ मैं, 
कब किसको क्या कैसे कहूँ मैं, 
नेरेटिव भईया फिक्स है सारा,
नेरेशन वही रटा रटाया 
अरे बंधी बंधाई लीक पे चलके 
लाइफ भी ऑटोमेशन लागे मोहे ।
दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे ।।

ऑफलाइन का वक़्त कहाँ है, 
मोबाइल पे सारा जहाँ है 
ऑनलाइन अब दोस्त है मिलते, 
LOL, LUL टाइप dm वे करते ,
यार दोस्त वो सच में है क्या, 
AI का हाय कोई, मॉडल लागे मोहे ।
दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे ।।

काम पर टार्गेट का प्रेशर हाय, 
डेड लाइन फिर बॉस बताए हाय,
मीटिंग पे मीटिंग फ़िर चलती है,
बैकलॉग की लंबी, सीडी बनतीं है,
शेर से ज्यादा खतरनाक! उफ,
लेटर ऑफ़ टर्मिशन लागे मोहे।
दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे ।।


शौपिंग भी एक कंफ्यूजन है,
ब्रांड को लेकर obsession है,
नीड से ज्यादा ग्रिड है दिखती, 
शो बाजी वाली हर चीज है बिकती,
किडनी के बदले आई फोन का,
सौदा भी सेलिब्रेशन लागे मोहे ।
दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे ।।

अब भीड़ में खुद को ढूंढ रहा हूं ,
नहीं अवगत मैं, कहाँ खड़ा हूं ,
सीधी राह पर चलना, मुश्किल लागे,
यहां सीधा सच्चा, क्रिमिनल लागे,
संसार के इस नये चक्रव्यूह में,
सच बोलूँ हर कोई, दुश्मन लागे मोहे ।
दुनिया री, मुई! डायन लागे मोहे ।।

Saturday, September 13, 2025

इवोल्यूशन थ्योरी

एक दिन सपने में देखा एक सपना,
वो जो डार्विन है ना अपना,
एक लाल मुंह के बंदर से गप्पे लड़ा रहा था,
गप्पे क्या लड़ा रहा था ,
अपना ज्ञान जबरन उसे पीला रहा था,
अपनी इवोल्यूशन थ्योरी बता रहा था।

तो डार्विन बोला बंदर से,
बंदर महोदय शायद तुम्हे नहीं पता है,
मेरा अध्ययन ने स्थापित किया है,
की मनुष्य का विकास बंदर से हुआ है।

बंदर जो अब तक केला ठूस रहा था,
डार्विन की बातें को हवा में फूंक रहा था 
ये सुन कर अचानक रुक गया,
डार्विन की और थोड़ा झुक गया,
फिर बोला आश्चर्य से,
बंदर से !
कौन सा वाला ?
भाई साहब,
बी स्पेसिफिक!
लाल मुंह वाला की काले मुंह वाला?
मैकाक था या गिब्बन था या फिर था लंगूर ?
अरे 200 टाईप के बंदर होते हैं हुजूर,
गोरिल्ला की तो मैं बात ही नहीं कर रहा,
उसके मुकाबले तुम्हे नहीं धर रहा,
कद में गोरिल्ला कहां और तुम कहां,
सो वो तो मानव बनने से रहा ।
और बंदर की को भी इज्जत है, मानव क्यूं बनेगा?
समूह में सच्ची समाजवादी ज़िंदगी जीने वाला 
मानव की विकृत मानसिकता की भेंट क्यों चढ़ेगा ?
डार्विन भाई कुछ गलती हो रही है,
इस इवोल्यूशन थ्योरी का मूल में,
 कम से कम बंदर तो नहीं हैं।
मानव  लगता तो हैं कुछ कुछ हम जैसा 
पर हमारे स्तर पर पहुंचा नहीं है,
हमारी व्यवस्था में सब कुछ सही है,
और इंसान होने की हमको जरूरत नहीं है।

Thursday, June 19, 2025

पत्नी की तारीफ (शादी की सालगिरह विशेष)

अपनी शादी की सालगिरह सोचा काव्यमय मनाऊं ।
चैट जीपीटी से  पत्नी की तारीफ में कविता लिखवाऊं।

चैट जीपीटी को ओपन कर बोला,
भाई पत्नी की तारीफ में चार पंक्तियां बताना।

चैट जीपीटी बोला 

महोदय !
समग्र अंतरजाल खाली पड़ा है,
ऐसा कोई उदाहरण नहीं वहां है,

आप के पास ही कोई शब्द है,
तारीफ का तो बतलाना !
खामखां मुझसे झूठ ना बुलवाना।

Tuesday, October 15, 2024

टिकट व्यवस्था

भगवान भी देख कर हंसता है,
मेरे दर्शन को टिकट व्यवस्था है।
दीन के नाम पर खून की होली,
किस ने बताया, ये कौन सा रस्ता है।
दूध तेल की गंगा, नाली में बहती,
सड़क किनारे कोई भूख से खस्ता है।
रोटी के लालच में जो बदला दीन,
या तो मै सस्ता हूँ या दीन सस्ता है
नाम अलग दुकान सारी एक सी ,
मूर्ख इंसान देख कर भी फंसता है।

Monday, September 30, 2024

देव का दूत

इक बार यूं हुआ की,
धरा पर
श्री नारद जी
मनुष्यों से टकरा गए।
असमंजस में पड़े,
हकबका गए।

सुर असुर यक्ष राक्षस  
यूं तो हर एक को किया है परास्त ,
पर मनुष्य पर किसका वश, 
वो है बड़ा खास।

इंसानों का पर देवलोक में भी 
रिकॉर्ड बड़ा खराब है ।
इंद्र देव भी कहते हैं ,
इनके मुंह लगना भी पाप है।

उनके इंस्ट्रक्शनस बड़े कड़े हैं ,
उस राह से मत गुजरों,
इंसान जहां खड़े है।

पर मरते ना क्या करते
सामना मानव से हो चुका था
शीश झुकाए खड़े हैं मानव,
आशीर्वाद का समय आ पड़ा था।

डर था कुछ मांग ना ले उल्टा सीधा
स्वर्ग के अवैध कब्जे का 
इंद्र जी को वैसे भी डर था।

जल्दबाजी में तुरंत दिया आशीर्वाद नारद जी ने ,
और अंतर्ध्यान हो गए,
आशीर्वाद में मनुष्यों को बनो 
देव का दूत कह गए।

यहीं ! यहीं इस घटना को आया उपद्रव का स्वरूप
शीघ्रता में नारद जी ने नही बताया,
किस देव का दूत।
मनुष्य की मति देखो कितनी अद्भुत,
वो अब धरा पर बन बैठे हैं,
यमदूत यमदूत यमदूत।

Wednesday, January 31, 2024

कवि की मृत्यु

सोचता हूं जब 
मुझ जैसी कवि की मृत्यु आएगी
स्वर्ग की ट्रेन, नरक की ट्रेन
सवारी कहां की टिकिट पाएगी।

बड़े पुण्य किए हों हमने 
अब ऐसा भी नहीं है ,
पाप लेकिन
तथाकथित पुण्यत्माओं जितने भी नहीं है।

कहीं ऐसा तो नहीं होगा ?
काउंट कम होने के कारण,
आत्मा त्रिशंकु जैसा अधर में लटका होगा।
न स्वर्गवासी न नरकवासी की
उपाधि आयेगी।
अरे पूजा में पंडितो की जमात पर
मेरे नाम के आगे पर स्वर्गवासी ही लगाएगी।
इस झूठे प्रमाणपत्र के चक्कर में
आत्मा यमपुरी के चक्कर लगाएगी।
मुक्ति न मिलेगी तो,
सबको भूत बन कर सताएगी,
फिर आत्मा शांति के लिऐ
कवियों की मंडली शायद
मेरे स्मरण में कवि सम्मेलन करवाएगी,
बॉस पर गारंटी कुछ नही की इससे
आत्मा शांति पाएगी।
व्यतिथ हो कर हो सकता है आत्मा 
किसी शरीर में प्रवेश कर जायेगी,
और
और
और
खुद कविता सुनाएगी
यमलोक तक आवाज जायेगी
कौन बचा है कवियों से ,
यम की भी शामत आएगी
मुझे लगता है दो चार कविताओं में ही 
यमपुरी कंपकंपा जायेगी,
कवि की आत्मा तभी मुक्ति पा जायेगी
अंततः स्वर्गवासी कहलाएगी।

Wednesday, April 18, 2007

सर-पैर

सर बोला पैर से,
तू तुच्छ , मैं महान |

पैर बोला कैसे श्रीमान ?

सर बोला
रे मुरख , तुझे तो कुछ भी न पता है
देख मैं कहां शिखर पर,
और तू जमीन पर धुल मे पडा है |
देख मेरा स्थान सर्वोच्च है
और इसीलिये तु तुच्छ है |

पैर बोला भूलावे मत रहीये श्रीमान,
मुझ से ही है आप का मान,
मैं हूं खडा लेकर आप का बोझ,
मैं ही घुमाता हूं आप को रोज,
जिस दिन मै थक जाउंगा,
आप को शिखर से भूमी पर ले आउंगा |

ह्रदय जो सुनता था सर-पैर का विवाद,
उसने दोनो को दिलाया याद,
किस बात का विवाद करते हो,
क्यो आखीर झगडते हो,
ये शरीर अंगो की एक इकाई है,
और हमारी एकता मे ही
शरीर की भलाई है |