Tuesday, July 30, 2019

बस तेरे नाम

बस तेरे नाम कर दी मैंने |
ज़िन्दगी तमाम कर दी मैंने ||
एक लत तेरी छूटती ही नहीं |
बाकी तो हराम कर दी मैंने ||
इंतिहा इंतिजार की ना पुछो |
ज़िन्दगी की शाम कर दी मैंने ||
जिस गली में रूह बसती थी|
वो गली बदनाम कर दी मैंने ||
*ऋषिकेश खोडके "रूह"*

Sunday, March 17, 2019

अहसास

मन की ,
फटी जेब से,
अभी-अभी गीरा और
टुट गया,
एक अहसास ,

की तुम मिलोगे कभी !

देखें थे आँखों ने
जो शबनमी,
टूट गए हैं
वो ख्वाब,

की तुम मिलोगे कभी !

तेरे मिलन की
बरखा मे भीगू,
रूठ गई है
वो आस,

की तुम मिलोगे कभी !

Sunday, February 10, 2019

दरिया

दरिया के उतरते पानी में
सब बहा दिया मैंने,
मन की बेचेनियाँ,
जीवन के दुख,
तमाम परेशानियां |

दरिया देखकार बोला
हँसते हुए,
पागल !
चढते पानी के साथ,
मै सब दुगना लौटाता हूं |

***ऋषिकेश खोड़के "रूह"***