Sunday, March 17, 2019

अहसास

मन की ,
फटी जेब से,
अभी-अभी गीरा और
टुट गया,
एक अहसास ,

की तुम मिलोगे कभी !

देखें थे आँखों ने
जो शबनमी,
टूट गए हैं
वो ख्वाब,

की तुम मिलोगे कभी !

तेरे मिलन की
बरखा मे भीगू,
रूठ गई है
वो आस,

की तुम मिलोगे कभी !