Thursday, July 2, 2026

नेता हूँ मैं

बिन पेंदी का लोटा हूँ मैं, 
सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

चरैवेति मंत्र मानता हूँ, 
स्व लाभ पहचानता हूँ,
गधा कितना भी हो गधा,
वक़्त पडे, बाप मानता हूँ।
मक्कारी भरी है खून में, 
सच्चा कलयुगी बेटा हूं मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

वादों की खेती करता हूँ,
सपने आँखों में भरता हूँ,
कुर्सी देख मैं गिरगिट सा,
अपना रंग बदलता हूँ।
सिद्धांत बेच के मंडी में,
नोट करारे लेता हूँ मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

जनता का तबतक मान है,
जब तक देश में मतदान है,
जीत गये तो पाँच बरस तक,
अपुनच साला भगवान है।
फिर बिसात क्या जनता की है,
मंदिर को भी ठग लेता हूं मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

दल बदलने को नीति कहूँ,
टिक जाने को प्रीति कहूँ,
सत्ता जिस करवट बैठी हो,
उस करवट की रीति कहूँ।
आराधक हूँ, अवसर का,
पलटी खाने को बैठा हूँ मैं।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं

कुर्सी ही मेरा धर्म ग्रंथ है, 
कुर्सी ही मेरा जाती पंथ है, 
कुर्सी मेरी पूजा-अर्चना,
कुर्सी ही मेरा आदि अंत है।
कुर्सी हो तो, हूं मैं कलियुग,
अन्यथा फिर त्रेता हूं मैं ।

सही पहचाने, नेता हूँ मैं।

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