Thursday, February 5, 2026

आएगा वक़्त गुज़र जायेंगे

आएगा वक़्त गुज़र जायेंगे ।
हम बन के राख बिखर जायेंगे ।।

मिट्टी का जिस्म मिले मिट्टी में ।
ले कर क़्या साथ बशर जायेंगे ।।

आईनों से मत सच को पूछो ।
सुन के सच, आप मुकर जायेंगे ।।

यादों के रंगबिरंगे धागे ।
हम ग़ज़लों में बुनकर जायेंगे ।।

पेचीदा रूह बड़ी ये दुनिया।
समझे तो आप सँवर जायेंगे ।।

3 comments:

Sweta sinha said...

वाह्ह लाज़वाब गज़ल सर।
सादर।
--------
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १० फरवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

M VERMA said...

आईनों से मत सच को पूछो
अब आईने भी सच नहीं बताते हैँ
सुन्दर

नूपुरं noopuram said...

वाह !
यादों के रंगबिरंगे धागे ।
हम ग़ज़लों में बुनकर जायेंगे ।।
बहुत खूब !