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Friday, March 6, 2026

चाह है इश्क़

चाह है इश्क़, आह भी है।
ज़िंदगानी तबाह भी है।।

दास्ताँ सब नही सुनहरी।
बारहा ये सियाह भी है।।

ज़ीस्त के पाँव जल रहे हैं।
धूप इसकी गवाह भी है।।

शहर की भीड़ में अकेली।
एक गुमनाम राह भी है।।

रूह खूँटी पे टाँग दो अब।
चाहते जो अथाह भी है।।

Thursday, February 5, 2026

आएगा वक़्त गुज़र जायेंगे

आएगा वक़्त गुज़र जायेंगे ।
हम बन के राख बिखर जायेंगे ।।

मिट्टी का जिस्म मिले मिट्टी में ।
ले कर क़्या साथ बशर जायेंगे ।।

आईनों से मत सच को पूछो ।
सुन के सच, आप मुकर जायेंगे ।।

यादों के रंगबिरंगे धागे ।
हम ग़ज़लों में बुनकर जायेंगे ।।

पेचीदा रूह बड़ी ये दुनिया।
समझे तो आप सँवर जायेंगे ।।

Saturday, November 1, 2025

भीड़ में तन्हा रहता है (ग़ज़ल)

भीड़ में तन्हा रहता है ।
ख़ुद से वो उलझा रहता है।।

एक समंदर है आँखों में ।
दिल मगर प्यासा रहता है।।

ज़ख़्म जो हो गर सीने में।
उम्र-भर ताज़ा रहता है।।

रात जब सब सो जाते हैं ।
ख़्वाब तब जागा रहता है।।

"रूह" की ये तो फ़ितरत है।
दर्द में हँसता रहता है।।