Thursday, July 30, 2026

अश्क अपने (ग़ज़ल)

अश्क अपने पिया कर।
ग़म नशा है, किया कर।।

रात-दिन दौड़ता है।
मन कभी तो रुका कर।।

इक तमाशा है दुनिया।
बैठ के बस तका कर।।

साँस का क्या भरोसा।
ज़िंदगानी जिया कर।।

ख़्वाब रख आँख में तू।
ख़्वाब से मत डरा कर।।

मौन भी बोलता है।
उससे बातें किया कर।।

दर्द जब हद से गुज़रे।
गीत कोई लिखा कर।।

रात चुपचाप रोना।
दिन में हँसते रहा कर।।

"रूह" पत्थर मिलेंगे।
आईना मत हुआ कर।।

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