Friday, July 3, 2026

मेघा आये रे

घुँघरू बाँध मेघा आये रे ,
छनन छनन गरजाए रे ,
वीना के सुर बोले बीजूरीया ,
पखवाज बदर सुनाए रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे।

दादुर पोखर शोर मचाये ,
टर्र-टर्र टर्र आलाप लगाए ,
टपटपटप बूंदन की अब तो ,
जियरा मोरा हुलसाए रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे।

झिमिर-झिमिर ये मंद फुहारें ,
मल्हार गावे सब नगरी द्वारे ,
जलतरंग सुन बरखा की ये ,
अकुलाये मोरी अटरिया रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे ।

पवन चले मगन, मतवारा,
भीगे पपीहा, वन भी सारा ,
तरकश से तीर इंद्र निकाले,
सप्त रंग जगत दिखलाये रे।

घुँघरू बाँध मेघा आये रे ।

No comments: