घुँघरू बाँध मेघा आये रे ,
छनन छनन गरजाए रे ,
वीना के सुर बोले बीजूरीया ,
पखवाज बदर सुनाए रे।
घुँघरू बाँध मेघा आये रे।
दादुर पोखर शोर मचाये ,
टर्र-टर्र टर्र आलाप लगाए ,
टपटपटप बूंदन की अब तो ,
जियरा मोरा हुलसाए रे।
घुँघरू बाँध मेघा आये रे।
झिमिर-झिमिर ये मंद फुहारें ,
मल्हार गावे सब नगरी द्वारे ,
जलतरंग सुन बरखा की ये ,
अकुलाये मोरी अटरिया रे।
घुँघरू बाँध मेघा आये रे ।
पवन चले मगन, मतवारा,
भीगे पपीहा, वन भी सारा ,
तरकश से तीर इंद्र निकाले,
सप्त रंग जगत दिखलाये रे।
घुँघरू बाँध मेघा आये रे ।
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