Monday, December 18, 2023

परों को आजमा के देखो। (ग़ज़ल)

परों को आजमा के देखो।
ऊंचाइयों पे जा के देखो।।
कोई आवाज़ नही उठेगी।
बस्तियों को जला के देखो।।
कब्जे में हैं फुटपाथ भी।
चादर तो बिछा के देखो।।
फुटपाथ पे मरी सर्दी।
चादर को हटा के देखो।।
परिंदे आ ही जायेंगें।
दरख्तों को लगा के देखो।।
किसी का टिफिन बॉक्स है।
कूड़े के पास जाके देखो ।।
कोई सुन ले रूह शायद
शोर में चिल्ला के देखो।

Thursday, December 14, 2023

धूप को छांव (ग़ज़ल)

धूप को छांव कहना सीख लिया है।
हर हाल में रहना सीख लिया है।।
कब तक रोक सकोगे तुम उसको।
जज़्बात ने बहना सीख लिया है।।
अम्मा ने पूछा हाल, ब्याही बेटी का।
बोली वो अब सहना सीख लिया है।।
तवारीख़ धुंधली पड़ने लगी तो ।
इमारत ने ढहना सीख लिया है 
मानिंदे मोती रूह पिरोये आसूं 
उसने ये गहना सीख लिया है।।

Saturday, December 9, 2023

दिल में हमारे (ग़ज़ल )

दिल में हमारे रह कर तो देखो।
छोटी जगह में बड़ा घर तो देखो।।
हम तो मुंतज़िर हैं जाने कब से।
उठाओ नज़रे, ज़रा इधर तो देखो ।।
नज़रें मिलाकर नजरें छुपाना।
दिल चुराने का हुनर तो देखो।।
बड़ी छोटी सी इक अर्ज है हमारी।
साथ हो ज़िंदगी का सफ़र तो देखो।।
बड़ा ध्यान देकर सुनते हैं वो।
रूह की शायरी का असर तो देखो।।

आरामपसंद (ग़ज़ल)

आरामपसंद भी हो जायेंगे ।
बिस्तर पर बांस के सो जायेंगे।।
ख्वाहिशें कुछ अब भी बाकी है।
और यम कहता है चलो जायेंगे।।
दुआ मांगों देख डूबता सितारा।
अरमान मुकम्मल हो जायेंगे।।
ख्वाबों को अपने जिंदा रखना।
वक्त की आंधी में ये खो जायेंगे।।
भेड़ चाल में फंस कर रह गए।
अकेले अब कहीं चलो जायेंगे।।
कुछ घूंट बचे हैं ज़ीस्त के साकी।
अब पीकर हम इसको जायेंगें।।
रूह कहे सब अजर अमर है।
सिर्फ बदल जिस्म ही तो जायेंगे।
**ऋषिकेश खोडके "रूह"**

Tuesday, November 21, 2023

सांसें हैं लिया करो।

सांसें हैं लिया करो।
थोड़ा सा जिया करो।।

ज़िंदगी शराब है ।
थोड़ी सी पिया करो।।

जवाब आ जायेगा।
गुफ्तगू किया करो।।

चाक है ,नुमायां है।
गरेबां सीया करो।

नामे रूह आसां है।
लबों से लिया करो।।

Friday, November 10, 2023

चलिए उनसे बात करेंगे

चलिए उनसे बात करेंगे।
ज़ाहिर दिले-जज़्बात करेंगे।

इश्क शायद होगा मुश्किल ।
कोशिश हम दिन रात करेंगे।।

खड़े हैं दर पर ले के झोली ।
हुज़ूर आयेंगे ख़ैरात करेगें।

भरे पड़े हैं आखों के बादल।
जाने कब बरसात करेंगे।।

तैयार होकर रूह खड़े हैं।
मालुम है वो घात करेंगे

Saturday, October 14, 2023

सफर कोई हो, मंज़िल तुम्ही हो।

सफर कोई हो, मंज़िल तुम्ही हो।
हर राह का , हासिल तुम्ही हो।।
दरिया हूं आखिर कहां जाऊंगा।
मेरी मौजों का साहिल तुम्ही हो।।
तफ्तीश का ढोंग क्यू करते हो।
मुमतहिन, मेरे कातिल तुम्ही हो।।
आज़मा कर देखे जाने कितने।
आखिर पाया की कामिल तुम्ही हो।।
रिश्तों की गरमी जो बनाए रखे ।
रूह इतने काबिल तुम्ही हो।।


कामिल : संपूर्ण 
मुमतहिन : जाँचने वाला